वेद मानव सभ्यता के लगभग सबसे पुराने लिखित दस्तावेज हैं। भारत का प्राचीन इतिहास की जानकारी का काफी भाग वेद से मिल जाती है.वेदों की रचना किसी एक व्यक्ति विशेष ने नहीं किया था. वेदों को अपौरुषेय (जिसे कोई व्यक्ति न कर सकता हो, यानि ईश्वर कृत) माना जाता है। माना जाता है कि यह ज्ञान विराटपुरुष से व कारणब्रह्म से श्रुतिपरम्परा के माध्यम से सृष्टिकर्ता ब्रह्माजी ने प्राप्त किया था । इन्हें श्रुति भी कहते हैं जिसका अर्थ है 'सुना हुआ ज्ञान'। प्राचीन कालके ब्रह्मा,वशिष्ठ ,शक्ति,पराशर, वेदव्यास ,जैमिनी याज्ञवल्क्यकात्यायन इत्यादि ऋषियोंको वेदोंका अच्छाज्ञाता माना जाता है।
भारत का इतिहास
धर्मग्रन्थ से प्राचीन भारत इतिहास की जानकारी
भारत के प्राचीन इतिहास को जानने में भारतीय धर्मग्रन्थ काफी महत्वपूर्ण हैं.
- भारत का सबसे प्राचीन लिखित धार्मिक धर्मग्रन्थ है वेद. वर्तमान में वेद के चार भाग हैं. वेदों के संकलनकर्ता थे - महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास .
- वेदों के पश्चात् भारतीय प्राचीन इतिहास की जानकारी मिलती है पुराणों में. पुराणों के रचयिता लोहमर्ष एवं उनके पुत्र उग्रश्रवा को माना गया है. पुराणों की कुल संख्या 18 है.
- इसके अलावा प्राचीन भारतीय इतिहास की जानकारी हमें "स्मृतियों" से भी प्राप्त होती है.
- बौद्धधर्म एवं उस समय के इतिहास की जानकारी "जातक" से प्राप्त होती है.
- जैन साहित्य की जानकारी "आगम ", "कल्पसूत्र", और "भगवातिसुत्र" से मिलती है.
- मौर्याकाल के बारे में सटीक जानकारी कौटिल्य द्वारा रचित "अर्थशास्त्र" नामक पुस्तक से मिलती है जो 15 अधिकरणों में विभक्त है.
- कल्हण द्वारा रचित संस्कृत साहित्य "राजतरंगिनी" से काश्मीर के साहित्य की जानकारी मिलती है.
- उसी प्रकार लेखक पाणिनि द्वारा रचित संस्कृत साहित्य "अष्टाध्यायी" से भी इतिहास की जानकारी मिलती है.
प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत
प्राचीन भारतीय इतिहास को जानने के लिए मुख्य रूप से चार स्रोत हैं.
(1) धर्मग्रन्थ
(2) ऐतिहासिक ग्रन्थ
(3) विदेशियों का विवरण
(4) पुरातत्व सम्बन्धी साक्ष्य
(1) धर्मग्रन्थ
(2) ऐतिहासिक ग्रन्थ
(3) विदेशियों का विवरण
(4) पुरातत्व सम्बन्धी साक्ष्य
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